Course Duration
2 Hours
2 Hours
Videos
1
1
No. Of Sessions
1
1
Sessions per week
At your own pace
At your own pace
At your own pace
Language
Hindi
Eligibility
Always open
Always open
Schedule of Classes
Starts on
-
Anyone
At your own pace
At your own pace
About the Teacher
ISKCON Bhagavata Mahavidyalaya
About the Teacher
ISKCON Bhagavat Mahavidyalaya aims to provide a facility for its members to study, practice, and disseminate the teachings of Srimad Bhagavatam, along with the writings of the Gaudiya Vaisnava acaryas and the branches of Vedic philosophy, culture, music and science in the context of Srila Prabhupada’s teachings. ISKCON Bhagavata Mahavidyalaya is located in Sri Govardhan dhama to systematically propagate the teachings of Śrīmad-Bhāgavatam and Caitanya-caritāmṛta to the society at large.
To accomplish the above mission, ISKCON Bhagavata Mahavidyalaya will facilitate philosophical training for adult residential and non-residential students through the traditional Vedic educational methods. ISKCON Bhagavat Mahavidyalaya has been inspired by the service and efforts of His Grace Gopiparanadhana Prabhu and His Holiness Gaur Krishna Gosvami Maharaja. Their dedication toward the study and the dissemination of the teachings of Srimad Bhagavatam is the torchlight guiding us forward to serve this mission.
Course Overview
पाठ्यक्रम शीर्षक:
श्री ईशोपनिषद
(श्लोक 7): आत्मा और परमात्मा में क्या अंतर है
पाठ्यक्रम विवरण:
यह पाठ्यक्रम श्री ईशोपनिषद के महत्वपूर्ण श्लोकों के विस्तार से अध्ययन पर आधारित है। इसके माध्यम से श्रोताओं को वेदांतीय तत्त्वज्ञान, आत्मा का विशेष महत्व, और उसकी प्राप्ति के मार्ग का ज्ञान प्राप्त होगा।
पाठ्यक्रम सामग्री:
- यस्मिन्सर्वाणि भूतानि (श्लोक 7):
- जिसमें सभी जीव रहते हैं और जो सभी जीवों में निवास करता है, वह व्यक्ति किसी भी प्रकार की पीड़ा का अनुभव नहीं करता। इस श्लोक से समझाया जाता है कि आत्मा अनन्त स्वातंत्र्य और शांति का स्रोत है।
लक्ष्य श्रोता:
यह पाठ्यक्रम उन व्यक्तियों के लिए है जो वेदांत और आध्यात्मिकता के गहरे अध्ययन के माध्यम से अपने जीवन को विकसित करना चाहते हैं।
पाठ्यक्रम की आवश्यकता:
इस पाठ्यक्रम की आवश्यकता उन लोगों के लिए है जो आत्मज्ञान, शांति, और आध्यात्मिक समृद्धि की खोज में हैं। यह उन व्यक्तियों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है जो वेदांतीय सिद्धांतों को समझना और अपने जीवन में उनके लागून के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं।
कोर्स से प्रतिभागियों को क्या मिलेगा?
- आत्मज्ञान: प्रतिभागी आत्मा और परमात्मा के बीच अंतर को गहराई से समझ सकेंगे।
- मानवता के प्रति सहानुभूति: सभी प्राणियों में आत्मा को देखने के सिद्धांत को अपनाकर प्रतिभागी मानवता के प्रति सहानुभूति और समर्पण का भाव विकसित करेंगे।
- आध्यात्मिक समृद्धि: आत्मा की सम्पूर्णता का अनुभव कर, आध्यात्मिक समृद्धि प्राप्त करने का मार्ग दर्शित होगा।
- आत्मनिरीक्षण की कला: समस्याओं के समाधान के लिए आत्मनिरीक्षण की कला सीखेंगे, जिससे व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में सुधार होगा।
- मानसिक शांति: वेदांतीय तत्त्वज्ञान को समझकर मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करेंगे।
क्यों करना चाहिए यह कोर्स?
- आध्यात्मिक संशोधन: अपने जीवन में आध्यात्मिक संशोधन और आत्मज्ञान की खोज में हैं।
- आनंद की खोज: जीवन में आनंद और संतोष की खोज में हैं।
- सार्थकता: अपने जीवन में सार्थकता और उद्देश्य प्राप्त करना चाहते हैं।
- आत्मनिरीक्षण: आत्मनिरीक्षण के माध्यम से समस्याओं के समाधान के लिए तैयार हैं।
- समर्पण और सहानुभूति: मानवता के प्रति समर्पण और सहानुभूति का विकास करना चाहते हैं।
हम इस पाठ्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों की कौन-कौन सी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं?
- आत्मज्ञान की कमी: आत्मा और परमात्मा के बीच अंतर को समझने में मदद।
- आध्यात्मिक शांति की कमी: मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने में सहायता।
- सहानुभूति और मानवता की कमी: सभी प्राणियों के प्रति सहानुभूति और आदर का भाव विकसित करना।
- आत्मनिरीक्षण की कला की कमी: आत्मनिरीक्षण की कला सीखने का अवसर।
- आध्यात्मिक समृद्धि की कमी: आध्यात्मिक समृद्धि का अनुभव कराना।
- जीवन में सार्थकता और उद्देश्य की कमी: आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जीवन को सार्थक बनाना।
इस प्रकार, यह पाठ्यक्रम प्रतिभागियों को आत्मज्ञान, शांति, और आध्यात्मिक समृद्धि प्राप्त करने का मार्ग दिखाता है, जिससे उनका जीवन अधिक संतुलित, शांतिपूर्ण और सार्थक बन सके।